सोमवार, १ फेब्रुवारी, २०१६

प्रारब्ध भोगणे








देहाचे बंधन | कळले देहाला |
व्याधीत जळला | तपोमार्ग ||१||
फुटलेले भांडे | कुठे डकवले |
आणिक ठेवले | संसाराला ||२||
ऐसा हा प्रकार | करुनी स्वीकार
प्रभू मार्गावर | चाललो मी ||३||
अशक्य तयाला | नसे इथे काही |
कशाला पुण्याई | वेचू पण ||४||
प्रारब्ध भोगणे | दाविले गुरूंनी |
देहात जगुनी | शांतपणे ||५||
तोच तो वारसा | जगतो घेवून |
नामात राहून | यथाशक्ती ||६||
देई देवराया | भोगायचे बळ |
करुनी निर्मळ | मोक्ष मार्ग ||७||
विक्रांत देहात | विकल विरक्त |
धूप चंदनात | हरवला ||८||

विक्रांत प्रभाकर तिकोणे
http://kavitesathikavita.blogspot.in


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